बचपन की गुल्लक

आज अनायास ही बचपन की वह गुल्लक याद आ गई जिसमें सालों पुरानी अनगिनत मासूम यादें अब भी महफ़ूज़ हैं I जिस तरह कहते हैं कि जो मज़ा इंतज़ार में है, वह दीदार-ए-यार में कहाँ , ठीक वैसे ही कोई भी चीज़ जब आपको बिना इंतज़ार किए मिल जाए तो उसकी क़ीमत का अंदाज़ा हीContinue reading “बचपन की गुल्लक”

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